- पहली राजस्थानी पैन-इंडिया फिल्म ‘धूड़’ देशभर के दर्शकों के लिए लेकर आ रही है एक सिनेमाई थ्रिलर
- Do Not Ignore Changes in Heart Rhythm: Dr. Aditya Pradeep Mulgaonkar
- रीढ़ की कई समस्याओं का इलाज अब 7–10 मिलीमीटर के छोटे चीरे से संभव
- Gurmeet Choudhary and Isha Malviya Take Audience on a Journey of Intense Love with Tum Mere Ho Teaser
- From Dil Chahta Hai to Prem Keetanu, How Bollywood’s Campus Film Has Changed With Every Generation
40 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को हृदय संबंधी बीमारी की आम समस्या है – डॉ. नितिन मोदी
रोज के खान-पान पर रखें ध्यान, प्रतिदिन 30 मिनट की करें फिजिकल एक्टिविटी
फिजिकल एक्टिविटी के साथ साँस फूलना या घबराहट होना होता है पहला लक्षण
इंदौर. विश्व भर में ह्र्दय रोग से जुड़ी बीमारियां बढ़ रही हैं। भारत में भी यह चिंता का विषय है। 40 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लोगों में हृदय रोग आम समस्या है। आमजन को हृदय रोग और उससे बचने के उपाय के प्रति जागरूक करने के लिए दुनिया भर में हर साल 29 सितंबर को ‘विश्व हृदय दिवस’ (वर्ल्ड हार्ट-डे) मनाया जाता है। इस साल की थीम ‘यूथ हार्ट फॉर एक्शन’ है, जिसका उद्देश्य लोगों को अपने दिल और उसकी बीमारियों बारे में अधिक से अधिक जानने के लिए प्रेरित करना है। इसी कड़ी में केयर सीएचएल अस्पताल के कार्डियोलॉजिस्ट ने लोगों को हृदय रोग और उनसे बचने के उपाय के बारें में जानकारी दी।
केयर सीएचएल अस्पताल के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. नितिन मोदी ने हृदय रोगों से होने वाली मौतों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि बदलती जीवनशैली, खानपान में बदलाव, तनाव, शारीरिक गतिविधि में कमी और धूम्रपान जैसे कारक हृदय रोग का प्रमुख कारण हैं। विशेष रूप से 40 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लोगों में हृदय रोग एक आम समस्या है। हृदय वाल्व रोग तब होता है जब आपके हृदय के एक या अधिक वाल्व ठीक से खुल या बंद नहीं हो पाते, जिससे आपके हृदय और शरीर में रक्त का प्रवाह प्रभावित होता है।
हृदय वाल्व रोग के लक्षणों में हृदय की धड़कन में अनियमितता आमतौर पर यह पहला लक्षण होता है। इसके अलावा सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, थकान, बेहोशी, पैरों में सूजन और अनियमित हृदय गति शामिल हैं।
इन लोगों को होता है अधिक खतरा
डॉ. मोदी के मुताबिक जिस व्यक्ति की उम्र 40 से अधिक है और वह ब्ल्ड प्रेशर, डायबटिक, कोलेस्ट्राल जैसी बीमारी है, उसको दिल का दौरा पड़ने का खतरा अधिक रहता है। इसके अलावा जेनेटिक में भी असर करती है। ह्रदय रोग से बचने के लिए लोगों को समय-समय पर ईसीजी और टीएमटी करवाते रहना चाहिए। रोज के खान-पान पर विशेष ध्यान रखना, प्रतिदिन 30 मिनट की फिजिकल एक्टिविटी के साथ कम से कम 10 हजार कदम पैदल चलना, युवाओं को जिम और बुजुर्गों को वाकिंग करना, जिम करने से पहले डॉक्टरों से सलाह लेनी चाहिए। नियमित व्यायाम करने वालों को हृदय संबंधी बीमारी होने की संभावना काफी कम हो जाती है।
स्वस्थ हृदय के लिए संतुलित आहार
केयर सीएचएल अस्पताल के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. मोदी ने बताया ” आहार में लिक्विड कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम होनी चाहिए। कार्बोहाइड्रेट की मात्रा 50-60 फीसदी, प्रोटीन की मात्रा करीब 20 फीसदी होनी चाहिए। खाने में ताजे फल व सलाद का उपयोग करें। फैटी चीजें में तेल व घी कम, जंक फूड व ज्यादा नमक खाने से बचें। फिजिकल एक्टिविटी के हिसाब से डाइट प्लान लें।
हृदय रोग के निदान के लिए किए जाने वाले परीक्षण
हृदय रोग के परीक्षण के लिए ईसीजी, एक्स-रे, ईको कार्डियोग्राफी और एक ट्रेड मिल टेस्ट किया जाता है, जो मुख्य रूप से सामान्य जांचे हैं। इसके अलावा हिमोग्लोबिन, क्रेटिनिन ,शुगर यह जरूरी जांचे होती हैं। केयर सीएचएल अस्पताल में हृदय की नलियों में कैल्शियम ज्यादा होने पर उसे साफ करने के लिए रोटेबलेशन, आईवीएल किया जाता है। कई बार ऐसा होता है ओल्ड एज व्यक्ति मरीज बायपास नहीं कराना चाहता या नहीं हो सकता है, उस कंडीशन में नई तकनीकों द्वारा उसकी एंजियोप्लास्टी की जाती है।


